December 03, 2004

प्रस्तावना

अमेरिका के कुछ महानगरों के हाईवे में सबसे बाईं तरफ की लेन एचओवी यानि कि हाई आकूपेनसी वेह्किल लेन कहलाती है| अगर आप को कुछ दूर तक हाईवे से बाहर नही निकलना , तो एचओवी लेन में आप एकसमान तेज गति से सफर कर सकते है| ईसमें निश्चित अंतराल पर प्रवेश व निकास के चिन्ह निर्धारित होते हैं| बस एक बार एचओवी लेन में प्रवेश कीजिए और फर्राटे से बिना लाल बत्ती या लेन बदलने की चिंता किए भागते जाइऐ | अमेरिका में जिंदगी भी बस एचओवी लेन की तरह लगती है| इस तेजरफ्ता जिंदगी जैसे हाईवे में हर शख्स अपनी गाड़ी एचओवी लेन में पहुँचाने को मगजमारी करता रहता है| जिस लेन में कोई रोकटोक न हो , न ही कोई अड़चन या रूकावट हो| एकबारगी ईस लेन में घुस जाने के बाद बाकी लेनों की धक्कामार जिदंगी यानी कि स्वदेश में कोई वापस नहीं जाना चाहता| लेकिन यह एचओवी लेन है एकदम बेरंग| कोई लालबत्ती नहीं, हमेशा तेज भागते रहने की मजबूरी और साथ ही न भाग सकने पर बाहर निकलने का खौफ | आदमी बस घोड़े का चश्मा लगाए, बिना दूसरी लेन में देखे बस भागता चला जाता है खींचते हुए अपनी जिंदगी की गाड़ी को| पता नहीं चलता कब मंजिल आ गई| कुछ इसी प्रकार से अपना जीवन बीता है| उम्र तमाम होती रही, परिवार में सदस्य जाते आते रहे| दोस्त मिले छूटे| कानपुर की गलियों मे एलएमएल-वेस्पा चलाते चलाते एक दिन खुद को अटलांटा में एचओवी लेन में पाया| अभी तक तेजरफ्ता रही इस जिंदगी में, जो अभी तक गुजरा है, उसमें से जो कुछ खट्टा - मीठा या गुदगुदाता सा है उन्हें समेट कर रोचक संस्मरणों का संकलन तैयार किया है "लाईफ ईन ए एचओवी लेन"|

4 comments:

vandy said...

HOV lane.... good interpretation.
when is the next serving due?

Anonymous said...

अतुल भाई, मुझे लिखते हुऐ बडा दुख हो रहा है कि आपकी विचारधारा बेहद सन्कीण्णॅ है केवल भारत की बडी कम्प्यूटर कम्पनियोँ के बारे मेँ, आपको बहुत कुछ जानने की जरुरत है टी सी ऐस, ईन्फोसिस और विप्रो के बारे मे'। आप खुद ही असुरक्षित महसूस करते है ईन कम्पनियोँ से। दुनिया मे ऍक महेश भाई से मिलकर आप किसी कम्पनी के बारे मे विचार कैसे बना सकते है। आपका ब्लाग पढकर कोफ्त हुई। आपकी विचारधारा विरोधाभासी है। दूसरी बात यह है कि हर जगह आप अपने आप को बेहद साफ सुथरा साबित करते रहते है और दूसरो का मजाक उडा कर ब्लाग को सस्ती लोकप्रियता दिलाने की कोशिश की है आपने। उम्मीद है कि निन्दक नियरे राखिये की तर्झ पर ध्यान देन्गे।

Anonymous said...

Very interesting blog. I like your humour on day today life events.

Univiz In said...

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